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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 97,नवम्बर(द्वितीय), 2020

गोल मटोल

हँस राज ठाकुर

सूरज भी गोल , चंदा भी गोल , हमारी प्यारी , धरती भी गोल । नन्हे – मुन्ने – चाँद – सितारो , तुम - सबके लिए हो अनमोल । खेलो - कूदो – नाचो - गाओ , बजाओ जीवन, संगीत का ढ़ोल । समय जब भी मयस्सर हो तुमको , पूरा करो तुम , मन का बोल । न कोई बंदिश , न कोई गर्दिश , सारी दुनिया गोल – मटोल ।

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