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वर्ष: 3, अंक 49,नवम्बर(द्वितीय)  , 2018



पुस्तक समीक्षा :
"गद्य पद्य का संगम है त्रिवेणी "
(कहानी-कविता-ग़ज़ल संग्रह)


समीक्षक -
ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश'


रचना मन के सुगठित भाव होते हैं. जिन्हें किसी भी विधा में पिरोया जा सकता है. बशर्त वे भाव उस विधा के अनुरूप हो. रचनाकार वह वाली है जो अपनने भाव रूपी फूलों को माला में पिरो कर उसे एक खूबसूरत आकार देता है.

माला फूलों के अनुरूप सुगंध बिखेरते हैं. साहित्य की यह माला पद्य और गद्य में रच कर पाठकों के समक्ष आती है तो यह पाठक ही तय करता है कि उसके समक्ष प्रस्तुत माला कितनी खूबसूरत और सुंदर बनी है.

जब किसी माला में सभी तरह के फूल गुंथे हो तो उसका स्वरूप ही बदल जाता है. सुंदर सफेद चमेली के फूलों के बीच गुलाब के फूलों की छटा निराली होती है. त्रिवेणी संग्रह कुछ इसी की तरह छटा बिखेरता नज़र आता है.यह संग्रह कहानी-,लघुकथा-, ग़ज़ल और कविता रूपी फूलों से सजी माला की तरह एक सुंदर गुलदस्ता है.

इस सुदंर गुलदस्ते को जितेन्द्र चौहान ने अथक मेहनत, सुझबुझ और अपनी काल्पनिक कुशलता से प्रस्तुत किया है. जिस में विधा के अनुरूप चार खण्डों में विभक्त किया गया है. .

पहले खंड में लघुकथा के अंतर्गत- सीख, बाप और सौ का नोट तीन लघुकथाएं सन्जौई गई है. जिसे डॉ अंजुल कंसल, डॉ योगेश नाथ शुक्ल और महाबीर रवांल्टा द्वारा लिखी गई है. तीनों लघुकथाएं उम्दा है. ये पाठकों के मन में एक चमक पैदा करती है.

दूसरे खंड में पांच कहानियां संग्रहित की गई है . कहानी एक रात की- वेद हिमांशु, पनाह घर-मोहनलाल घिवरिया, प्रेम पुजारी-डॉ प्रभु चौधरी, बूंदू खां का जनाजा - गिरधारी विजय 'अतुल' लाज- डॉक्टर रंजीत कुमार दिनकर की प्रस्तुत कहानियां मनोभावों को झंकृतकरने वाली कहानियां है.

तीसरा खंड मां को समर्पित किया गया है. इस के अंतर्गत रशीद अहमद शेख 'रशीद', शिव कुमार दुबे, विनय जैन 'विनय', दिनेश शर्मा, अर्चना सिंह की कविताएं -मां के मनोभावों को अभिव्यक्त करने में सफल रही है.

चौथा खंड कविता सप्तक के रूप में दिया गया है. इस में छः कवियों की सातसात कविताओं को संग्रहित किया गया है . आशा भाटिया,डॉक्टर चंद्रा सायता, देवेंद्र कुमार मिश्रा, चाँद मुंगेरी, दिनेश चंद शर्मा,शिव कुमार दुबे की कविताएं में कवि अपने भावों को अपने व्यक्तित्व और भाषा के अनुरूप दर्शाने में सफल रहा हैं.

त्रिवेणी संग्रह साहित्य के क्षेत्र में सफल प्रयोग रहा है. सभी विधागत रचनाएं अपने विधा में सफल प्रस्तुति देती है. कागज सफेद, छपाई साफ-सुथरी त्रुटी रहित हैं. मुखपृष्ठ आकर्षक और भावना प्रधान बनाया गया है. १०० पृष्ट की पुस्तक का मूल्य ₹ १५० वाजिब है. पाठको और रचनाकारों को इस तरह का प्रयोग को देखने के लिए इसे खरीद कर पढ़ना चाहिए. रचना को सजाने संवारने का यह तरीका अच्छा और उत्तम है. बधाई .


पुस्तक विवरण:

शीर्षक : त्रिवेणी (कहानी-कविता-ग़ज़ल संग्रह)
संपादक: जितेंद्र चौहान --091659 04583
पार्वती प्रकाशन, 738- द्वारिकापुरी, ज्ञान
सागर स्कूल गली, इंदौर-452009 (मप्र)

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