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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



रूला दिया


प्रीती श्रीवास्तव


                         
खत पढ़ने से पहले उसने जला दिया लोगो।
दिल मचलने से पहले उसने रूला दिया लोगो।।

हसरतें सब तार तार हो गई इस बहार में।
बारिस के मौसम मे उसने दगा दिया लोगो।।

जल उठी शम्मा तन्हा तन्हा आधी रात को।
जब परवाने ने आहिस्ता से हवा दिया लोगो।।

करवटो में फिर वो स्याह रात ढलने लगी।
चांदनी ने दहकता जिस्म जला दिया लोगो।।

ख्वाब पलको में आकर  बेवजह ठहरने लगे।
सिसकियों में सारी रात बिता दिया लोगो।।

याद आ गये संग बिताये वो हसीं रंगीं पल।
बीती हुई बातों ने दिल पर दस्तक दिया लोगो।।

कैद कर लूं उम्र भर को उन्हें जी चाहता था।
रेत सा फिसल गया  रूकने कहां दिया लोगो।।

गुजरा हुआ वो पल कहां लौटकर आयेगा।
बस ख्यालो में सारी रात बिता दिया लोगो।।
 

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