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वर्ष: 3, अंक 49,नवम्बर(द्वितीय)  , 2018



भारत का बिस्मार्क लौह पुरुष भारत रत्न सरदार बल्लभ भाई पटेल
संदर्भ:- जन्म दिवस 31 अक्टूबर


राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"


भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत की आज़ादी के बाद के प्रथम गृह मन्त्री और उपप्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद गुजरात मे एक लेवा कृषक परिवार में हुआ था। पिता झवेरभाई व माता लादबा देवी की आप चौथी संतान थे। सोमाभाई नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा स्वाध्याय से हुई।लन्दन से बैरिस्टरी की । वापस आये और अहमदाबाद में वकालत की। राष्ट्रपिता की प्रेरणा से वे आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने लगे। स्वतंत्रता आंदोलन में पटेल का बड़ा योगदान खेड़ा संघर्ष माना जाता है। गुजरात का यह खेड़ा भूख की चपेट में था। पटेल के प्रयासों से किसानों को करो में राहत दी गई। सरकार को झुकना पड़ा। किसानों के आंदोलन का पटेल ने नेतृत्व किया था। 1928 में बारडोली के किसानों के साथ रहे।

गृह मन्त्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देशी रियासतों को भारत मे मिलाना था। बिना खून बहाये उन्होंने यह बड़ा काम किया। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान को इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में लिख दिया गया।

पटेल के लिखे पत्रों को 1945 से 1950 की समय अवधि के पत्रों का प्रकाशन अंगेजी में नव प्रकाशन मन्दिर से किया। दस खण्ड प्रकाशित किये।बाद में इन पत्रों का हिन्दी अनुवाद भी किया।

सरदार पटेल चुना हुआ पत्र व्यवहार,सरदार के विशिष्ट और अनोखे पत्र,भारत विभाजन,आर्थिक और विदेश नीति,मुसलमान ओर शरणार्थी।

महान लेखक पटेल को कई सम्मान मिले। सरदार पटेल राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया।अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नाम सरदार बल्लभभाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया।1991 में मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

31 अक्टूबर 2013 को पटेल की 137 वी जयंती पर नए स्मारक का शिलान्यास किया। यह विश्व मे विशाल प्रतिमा स्टेचू ऑफ यूनिटी के नाम से जानी जाएगी। 93 मीटर से दुगनी ऊंची प्रतिमा बनेगी। पाँच वर्षों में 2500 करोड़ रुपये के लगभग की लागत से बनाई जाने वाली ये मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची धातु मूर्ति होगी।

भारत का एकीकरण करने वाले पटेल ने देश की 565 रियासतों को मिलाने का बड़ा काम किया।बारडोली सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने उन्हें सरदार की उपाधि प्रदान की।

एक साधारण किसान परिवार का मनुष्य लोह पुरुष बन गया।एक शूरवीर के रूप में पटेल ख्यातिप्राप्त थे। 200 वर्षों की गुलामी के बाद देशी रियासतों का एकीकरण कर बिखरे भारत को एक किया। जिसके लिए पटेल को किसी सैन्य ताकत की आवश्यकता तक नहीं पड़ी।

इनकी वाक शक्ति इनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। जिसके कारण इन्होंने लोगो को संगठित किया। इनके इस प्रभाव से सारा देश इनके साथ हो गया। 1922,1924,1927 में अहमदाबाद के नगर निगम के आप अध्यक्ष रहे। 1920 में गुजरात कोंग्रेस जॉइन की थी।1932 में गुजरात कोंग्रेस अध्यक्ष बने। गांधी नेहरू पटेल नेशनल कोंग्रेस कब उस समय मुख्य बिंदु थे। आज़ादी के बाद गृह मंत्री बाद में उप प्रधानमंत्री बने।

पटेल की आवाज़ में सिंह सी दहाड़ थी। ह्रदय में कोमलता। दीन दुखियों का सरदार था। दुश्मनों के लिए लोहे सा कठोर था।एकता की प्रतिमूर्ति थे पटेल।

कर्म से व्यक्ति महान बनता है। पटेल साधारण कृषक से देश के उपप्रधानमंत्री तक पहुँचे।

सरदार पटेल ने देश का एकीककरण किया । प्रतिवर्ष हम उनके जन्म दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं।

पटेल ने कहा था डर का सबसे बड़ा कारण विश्वास में कमी है। जिनके पास शस्त्र चलाने का हुनर है लेकिन फिर भी वे उसे अपनी म्यान में रखते हैं असल मे वे अहिंसा के पुजारी हैं। कायर अगर अहिंसा की बातें तो वह व्यर्थ हैं।

कर्मठ व्यक्ति ही ज्ञानेंद्रियो पर विजय श्री पाता है। क्रोध ही अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की शक्ति प्रदान करता है। महान कार्य करने के लिए शक्ति और विश्वास दोनों जरूरी है।


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