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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



नहीं मिटे सूदखोर


मोहन पांडेय


   
जमींदारी तो मिट गई 
मिटे बहुत सूदखोर 
लोकतंत्र की मंडी से 
नहीं मिटे घुसखोर।। 
लोकतंत्र में जुमला है 
हम भ्रष्टाचार मिटाएंगे 
आने दो सत्ता में हमको 
जेल इन्हें भेजवाएंगे 
  मजलूमो की पूंजी से 
करते हैं गठजोर।। नहीं मिटे घुसखोर।। 
थाली लोटा गहना गुरिया 
सब बिक जाए तो बिक जाए 
वा गरीब की रोटी का 
अवशेष निवाला बिक जाए 
वे ही सच्चे जनसेवक है 
नहीं करे मुख मोर। 
नहीं मिटे घूसखोर।। 
                

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