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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



कलयुग का आगमन


लवनीत मिश्रा


  
धर्म जात जब करे विभाजन,
समझो कलयुग आया है,
निर्धन के घर धन ना पहुंचे,
तो समझो कलयुग आया है,
ब्राहमण पोथी छोड जगत मे,
दर दर ठोकर खाएगा,
ज्ञान बेचकर इस युग मे,
आजीविका कमाएगा,
धर्म की रक्षा के खातिर,
क्षत्रिय नजर ना आएगा,
जात धर्म के आरक्षण का,
हिंसा ध्वज फहराएगा, 
वैश्य मिलावट कर चीजों मे,
धन बहुत कमाएगा,
शूद्र कलयुग मे बैठा,
सबको नाच नचाएगा,
जिस धरती पर राम कृष्ण को,
धन से तौला जाता है,
मिथ्या वाचन करके सबका,
मन फुसलाया जाता है,
ऐसे समय को देख हृदय मे,
खयाल यही बस आता है,
जब देख नयन से अश्रु छलके,
तो समझो कलयुग आया है।
 	

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