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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



आया पतियों का त्योहार


डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा 'द्रोण'


       
जब दो दिल हिल-मिल जाते हैं,
सम्बंधों के तार जुड़ जाते हैं।
पत्नी और पति जब बनते,
अग्नि के सात फेरे लगाते है। 
पत्नी बन पति की आयु को,
करवा चौथ का व्रत वह रखती है।
पति को परमेश्वर मानकर,
ईश्वर से प्रार्थना करती है।
जब तक जीवन रहे हमारा,
सुंदर सहज सुहागिन रहूँ।
अपने सुहाग की रक्षा को,
को वह यमराज से भी नही डरे,
लड़ने को वह अडिग रहे,
हरदम शक्ति से वो तैयार रहे।
वह सब कुछ करती है जिससे,
उसका पति गुणी-चिरायु बने,
पत्नी सदा पति की परायण रहे।
पत्नी की इच्छा रहे सदा,
पति मेरा लम्बी आयु प्राप्त करे।
बनू सुहागन पति की सदा,
स्वस्थ्य और मंगलकामना रहे।
कठिन निर्जल व्रत है करती,
पतिपरमेश्वर के लिए सब त्यागती है।
चाँद के दर्शन कर पति को है,
निहारती पति को चाँद की तरह।
कहती मेरा पति भी चन्द्र जैसा,
चमकता रहे सदा बस,
यही कामना रहती सदा,
पति के हाथों से जल पी कर,
करती है अपना व्रत पूर्ण यहाँ।

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