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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



दीया जलाएँ


देवेन्द्र कुमार राय


      
आओ मिलकर दीया जलाएँ।
अन्धेरे से उजियारा कर लें
ज्ञान प्रकाश सहारा कर लें
उम्मीदों की आस जगाएँ
आओ मिलकर दीया जलाएँ।
होगा जग का दूर अंधियारा
फैलेगा हर दिक उजियारा
हर दिल में अरमान जगाएँ
आओ मिलकर दीया जलाएँ।
युग युग तक प्रकाश प्रतिबिंबित 
सारे जन हो प्रेम अवलंबित
स्नेह का गीत सब मिलकर गाएँ
आओ मिलकर दीया जलाएँ।
नहीं किसी से द्वेष रहेगा
नहीं किसी से क्लेश रहेगा
ज्ञान का ऐसा लौ सुलगाएँ
आओ मिलकर दीया जलाएँ।
यह आर्यावर्त की थाती है
यह ऋषि मुनियों की संघाती है
ऐसा एक वन्दन गीत सुनाएँ
आओ मिलकर दीया जलाएँ।

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