Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



मजबूरियाँ


अनिरुद्ध सिन्हा


 
एक चीज़ थी बची हुई वो भी उतार दी 
मजबूरियों ने बाप की पगड़ी  उतार दी 

उसने फटे लिबास पर नज़रें न डालकर
अपने खुले बदन की  ग़रीबी  उतार दी

मौसम की मार का ये नतीजा तो देखिए
इठला के चलने वालों की ऐंठी उतार दी 

पुरखों के नाम की जो ज़मीनें थीं बेच दी 
खूँटी से   खानदानी  निशानी  उतार दी

वो क्या मिला कि मेरा सराफा बदल गया 
इक पल में मेरे जिस्म की सर्दी उतार दी 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें