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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



दोहे रमेश के दिवाली पर


रमेश शर्मा


                           
संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश ! 
दीवाली को पूजते, इनको सभी 'रमेश !!

आतिशबाजी का नहीं, करो दिखावा यार ! 
दीपों का त्यौहार है,… सबको दें उपहार !

आतिशबाजी से अगर,गिरे स्वास्थ्य पर  गाज !
ऐसे रस्म रिवाज को, .......करें नजर अंदाज !!

करें प्रदूषण वाकई, .....ऐसे रस्म रिवाज !
उनका करना चाहिए,झटपट हमें इलाज !!

पैसा भी पूरा लगे ,.......... गंदा हो परिवेश ! 
आतिशबाजी से हुआ,किसका भला "रमेश"!!

जी अस टी ने कर दिया , ऐसा बंटाधार !
फीकी फीकी सी लगे, दिवाली इस बार !!

सर पर है दीपावली, सजे हुवे बाज़ार !
मांगे बच्चो की कई ,मगर जेब लाचार !!

बच्चों की फरमाइशें, ......लगे टूटने ख्वाब !
फुलझडियों के दाम भी,वाजिब नहीं जनाब !!

दिल जल रहा गरीब का, काँप रहे हैं हाथ !
कैसे दीपक अब जले , बिना तेल के साथ !!

बढ़ती नहीं पगार है,....... बढ़ जाते है भाव !
दिल के दिल में रह गये , बच्चों के सब चाव !!

कैसे अब घर में जलें,... दीवाली के दीप !
काहे की दीपावली , तुम जो नहीं समीप !!

दुनिया में सब से बड़ा,. मै ही लगूँ गरीब !
दीवाली पे इस दफा, तुम जो नहीं करीब !!

दीवाली में कौन अब ,.... बाँटेगा उपहार !
तुम जब नहीं समीप तो, काहे का त्यौहार !!

आपा बुरी बलाय है, करो न इसका गर्व ! 
सभी मनाओ साथ में , .दीवाली का पर्व !!

लिया हवाओं से सहज, मैंने हाथ   मिलाय ! 
सबसे बड़ी मुंडेर पर, दीपक दिया जलाय !!

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