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वर्ष: 3, अंक 49, नवम्बर(द्वितीय) , 2018



दीवाली के रंग , पटाखों के संग


महेंद्र देवांगन "माटी "


                         
खुशियों की बहारें लेकर, आई है दीवाली ।
सबके मन "अनार " फूट रहा, छाई है खुशहाली।।
इठलाती गलियों से निकले, रंग-बिरंगी "फूलझड़ी " ।
नाज नखरा अपना दिखाये, "चुरचुटिया "की लड़ी।।
गोल-गोल जब " चरखी" घूमे, पप्पू खूब चिल्लाये ।
बड़े मजे से शुभम भैया," राकेट" खूब चलायें ।।
"पिस्तौलें " लेकर निकला है, देखो छोटू राजा ।
दौड़ा-दौड़ा कर सबको मारे, बजादे बैंड़ बाजा।।
" तोता" की आवाज सुनकर, नाचे प्रिया रानी ।
"ताजमहल " जब फूटे धड़ाम से,कान दबा ले नानी ।।
गली-गली में फूट रहा है, धड़ाधड़ "एटम बम" ।
जोर सब आजमा रहे, किसमें कितना है दम ।।
कोई मनाये खुशी तो, कोई करे गुस्सा ।
किसी का फटाका जोर से फूटे, किसी का निकला फुस्सा।।  
 

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