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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

दर्दे-दिल अब तक गया क्यों नहीं

डॉ० अनिल चड्डा

दर्दे-दिल अब तक गया क्यों नहीं, तू यादों से अभी तक गया क्यों नहीं। छुप -छुप के रो लिए बहुत, आँसू अभी तक सूखे क्यों नहीं। दवा भी कर ली, दुआ भी ले ली, कष्ट जिंदगी के कटते क्यों नहीं। बहुत दी आवाज मेरे दिल ने उन्हें, जाने वो मेरी सुनते क्यों नहीं। सुनते थे वफ़ा में बहुत दम है, वफादार हमसे वो रहे क्यों नहीं।

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