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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

" व्यंग्य काव्य रचना "
व्हाट्सऐप : जीवन नाशक अद्भुत लेप!!

सुनील पोरवाल "शेलु"

व्हाट्सऐप के दौर में, पड़ा ऐसा प्रभाव | खुशियाँ तो दिखती नहीं, दिखता केवल अभाव!! घर-परिवार के लोग सभी, बैठे घेरकर कोने | गजब चले रे भाग्य पर, ये व्हाट्सऐप के टोने !! बे-लगाम इस बीमारी से, सबका आपा खो गया | माँ किंचित ना घबराई, बच्चा भूखा ही सो गया!! मानवता का मासूम चेहरा, देता हर दम चीख | इंसान बनकर आदमी, ज़रा इंसानियत तो सीख!! सड़क पर घायल लोग, कराहते औ' बिलखते हैं | ऐसे संकटकाल में जनसेवक, अल्प ही दिखते हैं!! व्हाट्सऐप के भक्तों, भक्ति से इसकी हट जाओ | यदि देश की सेवा करनी है तो, "शेलु" जा सीमा पर डट जाओ!!


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