मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

निर्वाण
( बौद्ध धर्म को समर्पित कविता )

सुनील चौरसिया ‘सावन’

करो मत साधनों की साधना है पाप आत्मा को बांधना काम क्रोध ,लोभ ,मोह ,माया इनसे जीव जीवन में क्या पाया ? ज्यों मिटेगी एषणा की व्याधि मिलेगी तुम्हे शांति व समाधि रूप,वेदना, संज्ञा, संस्कार व विज्ञान जीव पावे जीवन में ‘सावन’ निर्वाण अष्टांगिक मार्ग पर जब चित्त होगा शुद्ध तब तुम भी तर जाओगे ,ज्यों गौतम बुद्ध द्वादश निदान ,है दुनिया में कहाँ ज्ञान ज्ञानी प्राणी तर गए , संसार है परेशान बचपन ,जवानी पार कर जर्जर होंगे लोग गले लगा लेगी ‘सावन’ शाश्वत मृत्यु रोग प्रकाश दो , प्रवर्तीतोदीपइव प्रदीपात् पुनर्जन्म को छोड़ो ,कुछ करो अभी संघात्

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें