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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

नारी पर प्रताड़ना

सौरभ कुमार ठाकुर

कब तक सहूँगी प्रताड़ना, कभी तो पूरी करो मेरी कामना । चीख-चीखकर रो रही हूँ मै, कभी तो मान लो मेरी कहना । मत करो तुम मेरी अवमानना, नही तो बाद में प पछताना। नारी शक्ती बन कर तैयार हूँ मै, अभी कभी मत मुझसे टकराना । मत करो तुम किसी पर प्रताड़ना, दहेज के लिए बहुओं को मत जलाना । नही तो नारी चंडी बन जाएगी । फिर मुश्किल हो जाएगा तुम्हारा जीना । अब नही करना तुम किसी से प्रताड़ना, अब तो है पूरा जागरुक जमाना ।


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