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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

दीपावली

राजीव डोगरा

उज्जवल प्रज्जवल दीप जले अंबर अवनी को रोशन करें। श्री रामचंद्र को याद करें जीवन के पंथ को आओ एक नया उपवन प्रदान करें। बन रहा जीवन जो तम का गहरा अंधकार। श्री राम के आदर्श जीवन से मिले उपसंहार से आओ उसे प्रकाशमान करें। मन्न तन्न में जो पनप रहा एक रावण स्वयं में। आओ स्वयं श्री राम बन उसका स्वयं ही संहार करें।

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