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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

रंगोली

नवीन कुमार भट्ट नीर

रंगोली देखो सजी,घर आंगन अरु द्वार। शांति दीप पावन भरे,हो मंगल परिवार।। रंग बिरंगी नेक सम,लाती अलग निखार। दिल से तोड़ो नीर अब,आओ सदा बहार।। चौक दीप पूजन समय,रंगोली की याद। आकर्षित करती सदा,करती पूर्ण मुराद।। रंगोली सम बाँटिए,रहे एकता प्यार। सम्पूर्ण हो कामना,यही नीर आधार।। मंगलकारी का बने,नीर प्रेरणाधार। रहें एकता साथिया,रंगोली अधिकार।।

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