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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

प्यार क्यों है

डॉ० अनिल चड्डा

ऐ मेरे घर की दीवारों मुझे तुमसे प्यार है क्योंकि तुमने सुख में, दुख में खुशी में, ग़मी में बिना शर्त मेरा साथ दिया है मेरे साथ खड़ी रही हो एक चटटान की भाँति पर मुझे क्यों लगता है तुम्हे मुझसे कोई सरोकार नहीं मेरी जगह किसी और के साथ भी तुम यूँ ही व्यवहार करतीं एक निर्विकार पत्थर की तरह फिर मुझे ही तुमसे प्यार क्यों है प्यार क्यों है


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