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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

" दीपावली पर्व पर विशेष दोहे "
" धनतेरस : धन से कोई रहे न बेबस!! "

सुनील पोरवाल "शेलु"

धनतेरस धन-धान्य से, हो जावे भरपूर, बाजारों में भीड़ लगे, छा जाए फिर नूर!! घर-घर में सजने लगे, नए-नए फूलदान, दीवाली से रोशन हो फिर, सारे रोशनदान!! घर का एक भी कोना, रहा ना कोई मैला, आँगणियां में चमके देखो, दीवाली की बेला!! सोना-चांदी खूब खरीदे, मिलकर लोग-लुगाई, तरह-तरह की देख पोशाकें, दीवाली मन भायी!! लक्ष्मी प्रसन्न हो जावे तो, धन की वर्षा होवे, घर की लक्ष्मी रूठ जावे तो, आदमी आपो खोवे!! ओ भाई, जरा बात मान लो, जमकर करो खरीदी, माँ-बाबा के संग में आए, धर्मपत्नी और दीदी!! ऐसा ये त्यौहार भला, जो घर में खुशी बिखेरे, मिष्ठानों संग कट जाएंगे, दुख के सारे फेरे!! माता सबको दे सदा, लक्ष्मी की सौगात, गली-गली में छा जाए, दीपों वाली रात!! आओ मनाए दीवाली, फुलझड़ियों के संग, आँगणियां में रंगोली के, निखरे सात रंग!! खुशियों के भी लग रहे ,बाजारों में दाम, " शेलु " दीवाली की, तभी सजे है शाम!! गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती का घर में सदा हो राज, धन-दौलत, बुद्धि के संग पूरण हो सब काज!!

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