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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

दोहे रमेश के दिवाली पर

रमेश शर्मा

संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश ! दीवाली को पूजते, इनको सभी 'रमेश !! आतिशबाजी का नहीं, करो दिखावा यार ! दीपों का त्यौहार है,… सबको दें उपहार !! आतिशबाजी से अगर,गिरे स्वास्थ्य पर गाज ! ऐसे रस्म रिवाज को, .......करें नजर अंदाज !! करें प्रदूषण वाकई, .....ऐसे रस्म रिवाज ! उनका करना चाहिए,झटपट हमें इलाज !! पैसा भी पूरा लगे ,.......... गंदा हो परिवेश ! आतिशबाजी से हुआ,किसका भला "रमेश"!! मंदी ने अब के किया , ऐसा बंटाधार ! फीकी फीकी सी लगे, दिवाली इस बार !! सर पर है दीपावली, सजे हुवे बाज़ार ! मांगे बच्चो की कई ,मगर जेब लाचार !! बच्चों की फरमाइशें, ......लगे टूटने ख्वाब ! फुलझडियों के दाम भी,वाजिब नहीं जनाब !! दिल जल रहा गरीब का, काँप रहे हैं हाथ ! कैसे दीपक अब जले , बिना तेल के साथ !! बढ़ती नहीं पगार है,....... बढ़ जाते है भाव ! दिल के दिल में रह गये , बच्चों के सब चाव !! कैसे अब घर में जलें,... दीवाली के दीप ! काहे की दीपावली , तुम जो नहीं समीप !! दुनिया में सब से बड़ा,. मै ही लगूँ गरीब ! दीवाली पे इस दफा, तुम जो नहीं करीब !! दीवाली में कौन अब ,.... बाँटेगा उपहार ! तुम जब नहीं समीप तो, काहे का त्यौहार !! आपा बुरी बलाय है, करो न इसका गर्व ! सभी मनाओ साथ में , .दीवाली का पर्व !! लिया हवाओं से सहज, मैंने हाथ मिलाय ! सबसे बड़ी मुंडेर पर, दीपक दिया जलाय !! हुआ दिवाली पर सदा,माँ को बडा मलाल ! सरहद से जब घर नहीं, लौटा उसका लाल !!

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