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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

पुरस्कार भइल व्यापार

देवेन्द्र कुमार राय

अब पइसा प बेंचाता पुरस्कार आइ हो दादा अब का कहीं, नावाचार भइल व्यापार आइ हो दादा अब का कहीं। अगुआ भइले गोबरघिं चोर कागा कहाले ज्ञानी मोर, जबरी चोर कहाले मीत कहाता गरी अब संगीत, पूजाता सगरो व्यभिचार। पढे़ पढा़वे के जे हाल ना जाने संस्था ओकरे के त्यागी माने, सम्मान के पगरी नीत जे उतारे अब शिक्षा चले ओकरे सहारे, ज्ञान बेंचाता खुले बाजार। रचि-रचि राय रगडि़ मरि गइले पढि़-पढि़ बड़का लोह्ला भइले, बड़ पनदुदुर भइल समाज कइसे बचाईं आपन लाज, लंगटपन भइल सुनर सिंगार आइ हो दादा अब टा कहीं नावाचार भइल व्यापार, आइ हो दादा अब का कहीं।

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