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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 72, नवंबर(प्रथम), 2019

एंटोन चेखव की कहानी "एल्बम" (THE ALBUM) का हिन्दी अनुवाद

अनुवादक - कुबेर

टिट्युलर पार्षद, क्रेटिरोव, जो उतना ही दुबला और छरहरा था जितना कि उसके प्रशासन का तौर-तरीका, झिमझोव को संबोधित करने के लिए आगे बढ़ा, और कहने लगा, ’’महामहीम! इस सुदीर्घ सेवा अवधि में, अपने प्रशासन के तौर तरीकों के द्वारा, आप हमारे हृदय की गहराइयों को स्पर्श कर चुके हैं, और आपके पितातुल्य व्यवहार ने ...

“दस साल से अधिक की अवधि में।“ जकुसिन ने टोका।

“दस वर्षों से अधिक के दौरान, हमने, आपके अधीनस्थ कार्य किया यह हमारे लिए चिरस्मरणीय रहेगा...... अर... ये दिन, महामहीम से विनम्र निवेदन है कि हम लोगों की ओर से सम्मान स्वरूप आप इस पोरर्टेट के साथ यह एल्बम स्वीकार कर हमें अनुग्रहीत करें, आपकी प्रतिष्ठा आजीवन कायम रहे, हम आशा व्यक्त करते हैं कि आनेवाले लंबे, लंबे वर्षों के लिए, जीवनपर्यंत आप हमें विस्मृत नहीं करेंगे। .....’’

“न्याय और प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए आपके पिता तुल्य मार्गदर्शन ने,’’ भौंह में अचानक छलक आये पसीने की बूँदों को पोंछते हुए जकुसिन ने, जो बोलने के लिए उतावला हुआ जा रहा था और जिसने अपना अच्छा-खासा भाषण पहले ही तैयार कर रखा था, एकाएक आगे बढ़ते हुए कहा, ’’और’’ कहते-कहते वह भावुक हो गया, ’’प्रतिभा, उद्यम और सामाजिक आत्म-चेतना के मानकों से युक्त आपकी यह सुदीर्घ सेवा अवधि हम लोगों को लंबे, लंबे वर्षों तक प्रेरित करती रहेगी।“

आँसुओं की एक धारा झिमझोव के झुर्रियों से बचे गाल को चीरता हुआ निकल गया। ’’सज्जनो!’’ कांपती आवाज में उसने कहा, ’’मुझे उम्मीद नहीं थी, मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि आप मेरी विनम्रता का जश्न मनाने जा रहे हैं। वास्तव में मैं आप लोगों की बातों से अत्यंत प्रभावित हुआ हूँ। बहुत, बहुत। इसलिए मैं इस पल को कभी नहीं भूलूँगा। मरने के दिन तक नहीं भूलूँगा और मुझ पर विश्वास करो, मुझ पर विश्वास करो, दोस्तों, कि आपकी भलाई के अलावा मैंने कभी कुछ भी नहीं चाहा। और यदि कुछ हुआ भी है, तो वह भी तुम्हारे हित के लिए ही था।“

मुख्य नागरिक पार्षद झिमझोव ने टिट्युलर पार्षद क्रेटरोव को चूम लिया, जिन्हें इस तरह के सम्मान की उम्मीद नहीं थी और वह खुशी से झूम उठा। तब मुख्य नागरिक पार्षद ने इशारा करके कहा कि अब वह आगे कुछ भी नहीं बोल सकता। उनका गला भर आया था और आँखें आँसुओं से भर चुकी थी। क्योंकि उसे भेट किया गया उस महंगे एल्बम ने उसे भावुक और कृतज्ञ बना दिया था। फिर जब वह थोड़ा ठीक हुआ और भाव से भरे कुछ और शब्द कहे और सभी के साथ हाथ मिलाने लगे तो वहाँ हर्ष के जयकारे गूँजने लगे। गूँजते हुए जयकारों के बीच वह नीचे चला गया, सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार करता हुआ अपनी गाड़ी में सवार हो गया। जब वह अपनी गाड़ी में बैठा तो उसने एक बार फिर ऐसी खुशी की भावनाओं की बाढ़ को महसूस किया जिससे वह अब तक अनजान था। और एक बार फिर उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।

घर में एक नयी खुशी उनकी प्रतीक्षा कर रहा थी। वहाँ उनके परिवार, उनके दोस्तों, और परिचितों ने उसके लिए सम्मान और प्रशस्ति का ऐसा वातावरण तैयार किया था जिसे देखकर उसे लग रहा था कि वास्तव में अपने देश के लिए उसने कितना महान कार्य किया है, और उसके न होने से देश का कितन बड़ा अहित हो जाता। रात्रिभोज का उत्सव टोस्ट, भाषणों और आँसुओं से छलक रहा था। संक्षेप में, झिमझोव ने कभी यह उम्मीद नहीं की थी कि उनकी खूबियों की इतनी गर्मजोशी से सराहना की जाएगी।

“सज्जनो!’’ उन्होंने मिष्ठान लेने से पहले कहा, ’’दो घंटे पहले मैं जिन परिस्थियों से गुजर कर आया हूँ उससे सेवक होने के नाते मैं एक आदमी के कर्तव्यों को समझ पाया हूँ। कह सकता हूँ कि सेवा दिनचर्या नहीं हैं, पत्रों का काम नहीं है, एक कर्तव्य है! अपनी पूरी सेवा अवधि में लगातार मैंने एक ही सिद्धांत का पालन किया है, ’जनता हमारी सेवा के लिए नहीं है, बल्कि हम जनता की सेवा के लिए हैं’। और इसके लिए मुझे सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है! मेरे मातहतों ने मुझे एक एल्बम भेट किया है। दखिए! इसने मुझे अभिभूत किया है।“

उत्सव में शामिल तमाम लोग उस एल्बम को देखने लगे।

“यह एक बहुत अच्छा एल्बम है”, झिमझोव की बेटी ओल्या ने कहा, ’’इसमें पचास रूबल की लागत आई होगी, मुझे विश्वास है। ओह, यह आकर्षक है! आपको मुझे यह एल्बम देना ही होगा, पापा, क्या आप सुन रहेे हैं? मैं इसका ध्यान रखूँगी। यह बहुत सुंदर है।“

रात के खाने के बाद उस एलबम को लेकर ओल्या अपने कमरे में चली गई और उसे अपने टेबल के दराज में बंद कर दिया। अगले दिन उसने क्लर्कों को उसमें से निकाल लिया, उन्हें फर्श पर फेंक दिया, और अपने स्कूल के दोस्तों को उनकी जगह पर रख दिया। सरकारी वर्दी ने उसके सफेद दुपट्टे की शोभ बढ़ाई। महामहीम के छोटे बेटे, कोल्या, ने उन क्लर्कों को उठाया और उनके कपड़े लाल रंग में रंग दिए। जिनकी मूंछें नहीं थीं, उनकी हरी मूंछें बना दी और जिनकी दाढ़ी नहीं थी उनकी भूरी दाढ़ी जोड़ दी। जब उसके पास पेंट करने के लिए कुछ नहीं बचा तो उसने कार्ड-बोर्ड से छोटे मानवाकृति काट लिया, उनकी आँखों में पिन चुभो दिया और उसके साथ सैनिक खेल खेलना शुरू कर दिया। टिट्युलर पार्षद क्रेटरोव को काटने के बाद, उन्होंने उसे एक माचिस की डिब्बी पर बिठाया और उसे उसी अवस्था में अपने पिता को दिखाने के लिए चला गया।

“पापा, एक स्मारक, देखिए!’’

जिमझोव ने हँसते हुए उसे फटकारा, आगे की ओर लपका, और, बच्चे को प्यार से देखते हुए, उसे गाल पर एक गर्म चुंबन दिया। ’’बदमाश, जाओ, मम्मा को दिखाओ, मम्मा को भी देखने दो।“

टिप्पणियाँ:-

1. टिट्युलर पार्षद - सिविल सर्विस वर्ग में 9वें श्रेणी का पद।

2. मुख्य नागरिक पार्षद - सिविल सर्विस वर्ग में 4 थे श्रेणी का पद जिन्हें ’’महामहीम’’ संबोधित किया जाता है।

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