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वर्ष: 3, अंक 48,नवम्बर(प्रथम)  , 2018



लोकोदय नवलेखन व पुस्तक लोकार्पण समारोह


दिनांक 14-10-2018 को जनपद बाँदा में डीसीडीएफ स्थित कवि केदारनाथ अग्रवाल सभागार में लोकदोय प्रकाशन द्वारा ‘पुस्तक विमोचन एवं नवलेखन सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक कर्ण सिंह चौहान ने की तथा मुख्य वक्ता वरिष्ठ लेखक व संपादक अशोक त्रिपाठी, वरिष्ठ कवि नासिर अहमद सिकन्दर, इंडिया इनसाइड पत्रिका के सम्पादक अरुण सिंह तथा युवा आलोचक अजीत प्रियदर्शी थे।

समारोह के प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ के युवा कवि/ कथाकार किशन लाल को उनके चर्चित उपन्यास ‘किधर जाऊँ’ के लिए वर्ष 2015 का ‘लोकोदय नवलेखन सम्मान’ दिया गया। वरिष्ठ आलोचक कर्ण सिंह चौहान ने स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किशन लाल को सम्मानित किया। नासिर अहमद सिकन्दर ने उत्तरीय एवं अशोक त्रिपाठी ने रु. 5000/- मूल्य की पुस्तकों का सेट भेंट किया। किशन लाल ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा कि मैंने जीवन के उन क्षणों को लिखा है जिनसे मैं गुजरा हूँ। इन्डिया इनसाइड पत्रिका के सम्पादक युवा पत्रकार अरुण सिंह ने कहा कि किशनलाल का ‘किधर जाऊँ’ यथार्थ का अनुभूत वर्णन है तथा व्यक्ति और समाज के बीच व्याप्त तमाम अन्तर्विरोधों का, उनके प्रभावों का दस्तावेज है। युवा कवि बृजेश नीरज ने किशन लाल का मान पत्र पढ़ा।

समारोह के दूसरे सत्र में बाबू केदारनाथ अग्रवाल के प्रिय शिष्य एवं वरिष्ठ कवि जयकान्त शर्मा के नवीनतम कविता संग्रह ‘घुटनों पर चलती उम्मीद की किरण’ तथा बाँदा के युवा कवि रामकरण साहू के कविता संग्रहों ‘गाँव का सोंधापन’ व ‘मुक्तावली’ विमोचन किया गया।

इसके उपरान्त जयकान्त शर्मा एवं रामकरण साहू ने अपनी कृतियों से चुनी हुई रचनाओं का पाठ किया। जयकान्त शर्मा की कविताओं पर बोलते हुए युवा आलोचक अजीत प्रियदर्शी ने कहा कि जयकान्त शर्मा की कविताएँ पीड़ा बोध की बेहद कुदरती अभिव्यक्ति हैं जहाँ चुकी हुई उम्मीदों में जिजीविषा की प्रबल आग है। अहमदाबाद से आए रामाशंकर मिश्र जी ने जयकान्त शर्मा के साथ अपनी यादों को साझा किया। इतिहासकार मदन सिंह ने जयकान्त जी को बधाई देते हुए उनकी कविताओं के प्रकाशन को बाँदा के लिए उपलब्धि बताया। जयकान्त जी के मित्र केदार टीम के सक्रिय साथी शक्तिकान्त जी ने जयकान्त जी की कविताओं के प्रकाशन के लिए लोकोदय प्रकाशन को तथा जनवादी लेखक संघ बाँदा को धन्यवाद दिया। टिल्लन रिछारिया ने कहा कि बाँदा में आज आयोजित मित्रों का ऐसा मिलन हमें अपनी पुरानी स्मृतियों तक ले जाता है। हमें बाबू केदार का दौर याद आ रहा है। जलेस बाँदा के सदस्य वरिष्ठ कवि रामौतार साहू ने कहा कि जयकान्त की कविताएँ भय मुक्ति की कविताएँ हैं। इस लेखक ने संसार के सबसे बड़े भय को अपनी रचनात्मक ऊर्जा से जीता है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि जयकान्त का कवि के रूप में आगे आने वाली पीढ़ियों को ताकत देगा तथा केदार से चली आ रही परम्परा को नयी पीढ़ी से जोड़ेगा। मुख्य वक्ता अशोक त्रिपाठी ने कहा कि जनपद बाँदा में अपने सभी मित्रों को एक साथ देखकर मुझे उस दौर का बाँदा याद आ रहा है। जयकान्त के बहाने आज सभी लोग हम एक मंच पर हैं। इसके लिए आयोजक लोकोदय प्रकाशन का आभार। वरिष्ठ कवि नासिर अहमद सिकन्दर ने कहा कि जयकान्त की कविताएँ ‘काल से होड़’ की कविताएँ हैं। वह मृत्यु से मुठभेड़ करते हैं और जीतते हैं। उनका यही भाव शमशेर और केदारनाथ अग्रवाल से उन्हें जोड़ता है। बाँदा में दूसरी बार उपस्थित हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ आलोचक कर्ण सिंह चौहान ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन में वर्ष 1973 के प्रलेस सम्मेलन की यादों को साझा किया और कहा कि बाँदा की स्मृति लेखक संगठनों में वैचारिक समझ, स्वायत्तता व लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्मृति है। पार्टी नीति और लेखक स्वतन्त्रता साथ नहीं चल सकती है। लेखक संगठन को अन्य जनसंगठनों जैसे नहीं चलाया जा सकता है। लेखक सवाल उठाता है इसीलिए पार्टी को दिक्कत होती है। बाँदा में केदारबाबू के बाद मैंने सोचा सब कुछ समाप्त हो गया लेकिन यहाँ अब भी केदार हैं, उनके शब्द हैं। अगर केदार आज का बाँदा देख रहे होंगे तो बड़े खुश होते होंगे। गोष्ठी को नगेन्द्र सिंह, प्रयुक्ति संपादक मुकुन्द मित्र ने भी सम्बोधित किया।

समारोह में आए हुए मेहमानों का स्वागत जलेस उपाध्यक्ष व ‘मुक्ति चक्र’ पत्रिका के सम्पादक गोपाल गोयल ने किया तो अन्त में वक्ताओं का आभार वरिष्ठ कवि जलेस बाँदा उपाध्यक्ष जवाहर लाल जलज ने व्यक्त किया। जलज जी ने कहा कि बाँदा की धरती आज धन्य हुई है। आप सबका आगमन हम सबके लिए गौरव की बात है। गोष्ठी का संयोजन युवा कवि प्रद्युम्न कुमार सिंह ने किया था तथा युवा गजलकार जलेस उपसचिव कालीचरण सिंह एवं जलेस कोषाध्यक्ष युवा गीतकार नारायण दास गुप्त ने आगन्तुकों का सम्मान करते हुए अंगवस्त्र पहनाया। समूचे आयोजन के मिनट्स तथा मीडिया रिपोर्ट का दायित्व वरिष्ठ पत्रकार जलेस उपाध्यक्ष अरुण खरे ने निर्वहन किया। संचालन जलेस बाँदा अध्यक्ष उमाशंकर सिंह परमार ने किया। अशोक त्रिपाठी, जीतू, बाबू लाल गुप्त, डीडी सोनी, आनन्द सिन्हा, अर्जुन सिंह, सत्येन्द्र गुप्ता, अरुण निगम आदि साहित जनपद बाँदा के सभी लेखक, पत्रकार, समाज सेवी व अधिवक्ताओं के साथ बाबू केदारनाथ अग्रवाल के सभी शिष्य और नजदीकी लोग समारोह में उपस्थित थे।


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