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वर्ष: 3, अंक 48,नवम्बर(प्रथम)  , 2018



पुस्तक-समीक्षा :
बालकथाओं की धूप का जादू


ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”


कहानी हमारी प्राचीन परंपरा रही है. वाचिक रूप से यह सब से प्राचीन विधा है. मनुष्य ने जब से बोलना सीखा है तभी से कहानी कहने की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है. कहानी कहना और सुनन सभी को अच्छा लगता है.

कहानी की यह परंपरा दादादादी व नानानानी से वाचिक रूप से पीढी—दर—पीढ़ी चली आ रही है. इन्हें हमारे पूर्वजों द्वारा सदा से सुना व सुनाया जाता रहा है. समय के साथ बदलते संसाधन के साथ कहानी की यह बरसों पुरानी वाचिक परंपरा अब छुटती चली जा रही है. अब किसी को कहानी कहने व सुनने में ज्यादा रूचि नहीं रही है. इसी के साथ कई परंपरा भी विलुप्त हो रही है.

इन वाचिक परंपरा को हमें समृद्ध करना होगा. तभी बच्चों में रोचक ढंग से, आनंददायक वातावरण में , कहानी के द्वारा स्ंस्कार रोपित किए जा सकेंगे. कुछ इसी तरह की अवधारणा को पुष्ट करती बात डॉ शील कौशिक अपने बाल कथा संग्रह — धूप के जादू, में व्यक्त की है. इन्हों ने उसी वाचिक परंपरा के निर्वाहन में मुख्य भूमिका निभाते हुए सुंदर, सरल व सहज ढंग से अपनी कहानियां व्यक्त की है.

कथाकार यही बात अपनी भूमिका में भी लिखती है, '' मीडिया और मोबाइल बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता छीन लेते हैं. जरा सोचिए कि क्या हम अभिभावक और शिक्षक इस सब के लिए जिम्मेदार नहीं है ?'' कथाकार इन शब्दों में अपनी बात कह कर अपनी बात इतिश्री नहीं की है. बल्कि अपनी इस जिम्मेदारी को अपने कहानी संग्रह में संग्रहित कहानियों के माध्यम से अपना फर्ज पूरा करने की कोशिश भी की है.

कथाकार की इसी कोशिश को उन का संग्रह बखूबी निभाता है. इस की भाषा सरल व सहज है. सहजगम्य वाक्य कहानी को रोचक बनाते हैं. क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से कथाकार ने यथासंभव बचने का प्रयास किया गया है. अंग्रेजी के शब्दों की अधिकता कहानी के प्रवाह को बाधित नहीं करती हैं.

कथाकार की शैली में भावप्रधानता का समावेश है. भाव सुंदर व ग्राह्य है. ये भाषा के प्रवाह को बनाए रखते हैं. इसी कारण कहीकही लंबे वाक्य के बावजूद कहानी प्रवाहमय और रोचक बनी रहती हैं.

प्रस्तुत पुस्तक में 16 बालकहानियां संग्रहित हैं. 'खत प्यारे सांता बाबा को'— कहानी में मयंक अपनी पिता की याद में एक खत लिखता है. जिस में उस की दिली इच्छा होती है कि फौज में गए उस के पिता लौट आए. इस कहानी में रोचकता अंत तक बनी रहती है. वहीं दूसरी कहानी 'आन्या की गुडिंया' तकनीकी संपन्न गुड़िया के बहाने के कथाकार अपनी पात्र को शानदार सीख दे जाती है.

'काला आसमान'— प्रदूषण की भयावहता पर प्रकाश डालती एक सुुंदर वे रोचक कहानी है. वही 'पानी अनमोल' पानी के महत्व को प्रदर्शित कर इस के महत्व को दर्शाती है. 'जुनून' अत्यधिक लाड़प्यार में बिगड़े बच्चे को होने वाली हानि को दर्शाती है.

'लौट आई मुस्कान' नाम के अनुरूप मुस्कान लौटाने में समर्थ है.'दादादादी रैंप पर' बुजुर्ग् मातापिता को रेखांकित करती है. 'सपना बच्चे का' सभी को बचपन में ले कर जाती है. ' और चिड़िया चली गई' नाम के अनुरूप इस के महत्व को प्रदर्शित करती है.

इस पुस्तक की प्रतिनिधि कहानी ' धूप का जादू' अपने नाम के अनुरूप कहानी में अपने जादूभरे कार्य को प्रदर्शित करती है. कुल मिला कर सभी कहानियां बहुत रोचक, ज्ञानवर्धन, सीखभरी, संस्कारयुक्त और मनोरंजक है.

संकलित कहानियां बच्चों को मस्ती और मनोरंजक के साथसाथ बहुत कुछ दे जाती है. संस्कार, चेतना, संवेदना, जागरूकता, सीखने के उददेश्य से भरपूर ये कहानियां बहुत बढ़िया और बच्चों के लिए आवश्यक है. हरेक मातापिता को इन्हें खरीद कर बच्चों को देना चाहिए.


पुस्तक: धूप का जादू (बाल कथा—संग्रह)
कथाकार: डॉ शील कौशिक 9416847107
समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ 9424079675
प्रकाशक— आयुष बुक्स,
डी—3—ए विश्वविद्यालयपुरी गोपालपुरा बाई पास
जयपुर—302018
9414076708
प्रथम संस्कारण:2018
पृष्ठ: 120 मूल्य: 150रू

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