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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



विजयादशमी


उमाशंकर सैनी


 
सुनो राम भक्त हनुमान, विजयादशमी है आज,
जैसे फूंकी थी लंका, उसपर सबको है नाज ॥  
 
किया था अंत बुराई का,
हुई थी सत्य पर जीत ॥   
झूम उठे थे भारतवासी,
और गा रहे थे विजयगीत ॥  
 
अमन शांति के इस देश मे,  
लगी फिर, आतंक रूपी,
रावण की नजर ॥
इस आतंक रूपी रावण को 
दहन करने,
फिर राम को आना होगा ॥  
 
शक्ति दो...भगवान... इन्हे,
जो लड़ रहे है ऐसे रावणौ से ॥
होगा सबको...फिर से गर्व,
और हम मनाएंगे भव्य विजय पर्व ॥   

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