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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



वफ़ा .....!!


तनूजा नन्दिता


 
वफ़ा ने जब भी
ख़ामोशी बरती
ज़िन्दगी फिर
जीने को तरसी...
इरादों के दायरे से बाहर निकल
दिन-रात के उलझन से निकल
खुद राहत की
चाह में सुलझी
औरों से चाहत
सब उम्मीदे झूठी
फिर ख्वाहिशों से निकली…..
न कोई तौल न कोई मौल
दो टूक मीठे प्यार के बोल
दिल की बेखुदी
दो पल की ख़ुशी
वफ़ा के हिस्से में दर्ज़
खामोश हर्फ़
अहसास ज़ब्त
ज़िन्दगी को पनाह
ख़ामोशी ने ली वजह
नंदिता साँसे संभाल रखी…!!

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