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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



यह जीवन है


मोती प्रसाद साहू


   
     

यह जीवन है जीवन्त नदी
कल-कल ध्वनि में बढ़ने दें।
ये तेरा ये मेरा कहकर 
यों ही गुजर न जाने दें।।

जीवन का आनन्द न गुम हो
आने वाले कल को लेकर।
देखो कैसा रुप निखरता
चिंताओं की उलझन तजकर।।

दिखता दुखियों की सेवा में
ईश्वर का सच्चा सानिध्य।
मानवता को करें जागरित
दानवता को करें हविष्य।।

धर्म से अर्थ करें संग्रह
हिंसा से करें किनारा।
संसार-सर में मन कमल हो
कितना सुन्दर जीवन प्यारा।।
 

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