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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



हमारी मातृ भाषा


जय प्रकाश भाटिया


  
हिंदी हमारी मातृ भाषा है, और यह है राष्ट्र की भाषा ,
हिंदी भाषा के ग्रंथो में निहित सब धर्मो की परिभाषा,
तुलसी,सूर, कबीर निराला, महा कवियों की है वाणी,
हिंदी भाषा पढ़ ज्ञानी बन गए, कितने अनपढ़ अज्ञानी,
हिंदी भाषा है मान हमारा , हिंदी भाषा से शान हमारी,
हिंदी का गुणगान जहाँ पर, वहां महिमा ज्ञान की सारी,
वेद ग्रंथो में अथाह ज्ञान है,निहित इनमें जीवन का सार,
श्रीकृष्ण की गीता ही दर्शाती ,सब जीवन कर्मो का आधार,
मेरे भारत में कई प्रान्त है, और यहाँ कई भाषाए बोली ,
कहीं पंजाबी कहीं बंगाली, कहीं और तमिल जाये बोली,
पर सबका स्रोत्र एक ही संस्कृत , सब में एक समानता ,
हिंदी इन सबकी अग्रणी भाषा, देश को एक सूत्र में बांधा,
आओ हम मिल हिंदी बोलें, हिंदी में अपना ज्ञान बढ़ाएं ,
वेदो का कर अध्य्यन , विश्व में अपने देश का नाम कमाएं .
 

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