Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



करवा चौथ


कवि जसवंत लाल खटीक


 
करवा चौथ का व्रत रखा है मेरी पत्नी ने ,
सुनो,चाँद तुम थोड़ा सा जल्दी आ जाना ।
दिनभर भूखी और प्यासी रहेगी जान मेरी ,
छलनी में दर्शन देकर फिर तुम चले जाना ।।

लाल साड़ी पहनकर गौरी ,खुश करे भरतार ,
काजल व मेहंदी के संग , करे सोलह श्रृंगार ।
इंतजार मत करवाना और जल्दी आ जाना ,
फिर में दूंगा मैं उसको एक प्यारा सा उपहार ।।

थोड़ी सी अठखेलियाँ तो हमेशा करते हो ,
सुहागिनो को वरदान देने जल्दी आ जाना ।
करती है पूजा आपकी , पूरे तन- मन से ,
उनके घरों में आप  खुशियां हजार लाना  ।।

पिया जी के सामने लगते हो आप फीके ,
उनको देख मेरा प्यार चढ़ जाता है परवान ।
अपने पिया जी की उम्र हो जाए लम्बी ,
इतना सा होता सब सुहागिनों का अरमान ।।

अपने साजन के लिए भरती है वो मांग ,
क्योंकि पियाजी में बसती है उनकी जान ।।
उनके लिए सुहागिनें पहनती है  मंगलसूत्र ,
क्योंकि पियाजी से ही है उनकी पहचान ।।

कालेे बादल भरे आसमान , में छुपे चाँद से ,
"जसवंत" कहे आप थोड़ा जल्दी आ जाना ।
सार्थक करना तुम तपस्या हर सुहागिन की , 
पिया मिलन की रात ,आशीर्वाद देके जाना ।।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें