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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



जाने क्या कुछ हुई ख़ता मुझसे


देवी नागरानी


  
जाने क्या कुछ हुई ख़ता मुझसे
रूठा वो बे सबब न था मुझसे.

जिसको हासिल न कुछ हुआ मुझसे
मौन का अर्थ पूछता मुझसे.

लोग क्या जाने जानने आए
नाता जिनका न था जुड़ा मुझसे.

जिसने रक्खा था कै़द में मुझको
खुद रिहाई था चाहता मुझसे.

ना-शनासों की बस्तियों में, कब
किसने रक्खा है राब्ता मुझसे.

सिलसिला राहतों का टूट गया
दिल की धड़कन हुई खफ़ा मुझसे.		 
 

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