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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

ज़रूरी नहीं

अजय प्रसाद

ईंट का जवाब पत्थर हो ज़रूरी नहीं, मौत ज़िंदगी से बेहतर हो ज़रूरी नहीं । हाँ जी लेते हैं कुछ लोग गफलत में, हर किसी को मयस्सर हो ज़रूरी नहीं । खुदकुशि कर लेतीं हैं खुशियाँ खुशी से, मौत हमेशा मंजिल पर हो ज़रुरी नहीं । मुरझा जातीं हैं मायूसी भी हाल देख के, ज़ाहिर हर बार चेहरे पर हो ज़रूरी नहीं । हारना भी जीत का ही आगाज़ है अजय, जीतना तुम्हारा मुक़्द्दर हो ज़रूरी नहीं।

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