मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

दो मीटर दूर

आशीष श्रीवास्तव

इधर जनता कर्फ्यू के बाद 21 दिन के लॉकडाउन का समाचार सुना और उधर सौभाग्य का मोबाइल बज उठा। मैं आ रही हूंॅ, क्या आप बस स्टेण्ड पर लेने आ सकते हैं? अपनी पत्नी रश्मि की आवाज़ सुनकर सौभाग्य बस स्टेण्ड पहुंच गया। वहां बस से उतरते हुए सौभाग्य ने अपनी पत्नी रश्मि को मुंह से मास्क हटाते देखा तो कुछ क्षण के लिए देखता ही रह गया।

हालांकि सौभाग्य के मन में गुस्सा भरा हुआ था, परंतु रश्मि का एकाएक आना सौभाग्य के लिए सरप्राइज से कम नहीं था, और मन को खुशियों से भर देने के लिए काफी भी था, इसलिए कुछ नहीं कहा। रास्ते में जरूर गाड़ी पर बैठी रश्मि से इतना भर कहा: इतनी दूर-दूर हटकर क्यों बैठी हो? रश्मि ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा, बोली: सोशल डिस्टेंसिंग! और दोनों ने व्यस्त ट्रैफिक से बचते-संभलते, घर की ओर उड़ान भरी। यातायात अव्यवस्था को देखकर सौभाग्य ने कहा: कल से यहां कर्फ्यू जैसा नजारा हो जाएगा। सुनकर रश्मि ने ‘‘हूं’’ कर दी।

शादी के तीन साल से सौभाग्य अपनी शिक्षिका पत्नी का ट्रांसफर अपने गृहजिले में कराने के लिए लगातार शिक्षा विभाग में आवेदन दे रहा है। एक-दो बार ट्रांसफर को लेकर रश्मि से यह कहते हुए बहसबाजी भी हो गई कि ‘‘तुम ससुराल आना नहीं चाहतीं, मायके के आसपास ही जानबूझकर बनी रहना चाहती हो। तभी आवेदन का फालोअप नहीं करतीं।’’ इस पर रश्मि बड़ी ही सहजता से सफाई देती कि ऐसा कुछ नहीं है, बीच शिक्षा सत्र में ट्रांसफर नहीं हो सकता। सौभाग्य ज्यादा कुछ कहता तो रश्मि एक ही रटारटाया जवाब देती कि पति-पत्नी का रिश्ता तो एक-दूसरे का साथ देने के लिए होता है और सौभाग्य गहरी सांस लेते हुए चुप्पी साथ लेता।

और फिर आखिरकार लॉकडाउन होते ही 21 दिन को स्वयं फोन करके रश्मि ससुराल आ ही गई। घर आकर साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए दोनों ने साथ में खाना खाया। फिर नवरात्र के दौरान पूजा-उपासना की तैयारी भी की।

इन दिनों सौभाग्य ने जाना कि सचमुच पत्नी-पति का रिश्ता पास या दूर रहने से नहीं, एक-दूसरे का साथ देने के लिए ही होता है। घर में दो हाथ दूर रहकर भी पत्नी के इस प्रकार के व्यवहार से सौभाग्य के मन में जो प्रेम उमड़ा तो कहने लगा: रश्मि तुम सच कहती हो। मैं नाहक ही तुम्हें लेकर परेशान हो रहा था। सच में पति-पत्नी का रिश्ता तो एक-दूसरे का साथ देने के लिए ही होता है। काश! ये बात सभी लोग समझ सकते। दोनांे भावुक पलों में खोये हुए थे कि तभी मोबाइल पर आए एक मैसेज को रश्मि पढ़कर सुनाने लगी: ‘‘किसी भी रिश्ते को कितनी भी खूबसूरती से क्यों न बांधा जाए, अगर नजरों में इज्जत और बोलने में लिहाज न हो तो वह टूट जाता है।’’


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें