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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

इस बार....नया ऐतबार....

आशीष श्रीवास्तव

नवरात्र के पारण पर कन्यापूजन और भंडारा तो हर बार करते थे, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए घर में ही रहकर नवरात्र के दौरान पूजा-उपासना की। अब बात आई अष्टमी पर कन्यापूजन की, क्योंकि एक-दूसरे से दो मीटर की दूरी का पालन भी करना था, इसलिए संयुक्त परिवार में रह रहीं जेठानी-देवरानी ने तय किया कि वे इस बार भंडारे में भेजी जाने वाली सामग्री जरूरतमंद लोगों को दान करेंगी।

पर मुश्किल ये थी कि लॉकडाउन के चलते घर से दूर भोजन-पानी के लिए परेशान हो रहे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा कैसे जाए?

देवरानी-जेठानी के निश्चय को देखते हुए घर के अन्य सदस्य विचारमग्न थे ही कि समाचार-पत्र पढ़ते हुए देवरानी की नजरें एक चित्र पर ठहर गईं। तुरंत जेठानी को और अपने पति को बताया कि देखिये कैसे पुलिस सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए सुरक्षा व्यवस्था के बीच लोगों को सहायता पहुंचा रही है।

सभी पुलिस थाने में भोजन सामग्री पहुंचाने पर बात कर ही रहे थे कि उनके कानों में घर पर रहने का ऐलान सुनाई दिया। बालकनी से देखा तो एक पुलिस जीप एनाउंसमेंट कर घर की ओर ही आ रही थी।

देवरानी-जेठानी ने भंडारे की सामग्री के पैकेट बनाये और पुलिस से बात करते हुए उन्हें पूरी सामग्री जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए सौंप दीं। पुलिस ने दोनों का सेवाभाव देखा तो बोली: आपके व्रत जरूर सफल-सार्थक होंगे। हम कोरोना की लड़ाई ऐसे ही दूर से साथ रहकर, सहयोग करके ही जीतेंगे। पुलिस की श्रद्धाभाव से भरी बातें सुनकर दोनों दंपति में नया विश्वास जागा। संकट की घड़ी में छोटी-सी पहल से उनमें आत्मसंतोष की झलक भी देखी गई। कहने लगे। कन्यापूजन और भंडारा तो हर बार करते हैं ये फिर कभी। लेकिन इस बार नवरात्र में ये पावन कार्य करके मन सचमुच आनंदित हो गया।

ये सब नजारा जब पड़ोसियों ने देखा तो वे भी मदद को आगे आ गए।


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