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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

बिसात और औकात ....

वीरेन्द्र कौशल

नासमझ आदमी अपनी सारी ज़िन्दगी के पल बिसात बिछाने और दूसरों को उनकी औकात दिखाने में निकाल दिया करते .... और समझदार की अपनी ज़िन्दगी का हर पल दूसरों की बिसात और अपनी औकात देखने में ही निकल जाया करती ज़िन्दगी जी तो लें पर जीने कौन देता मामला वही बिसात और औकात


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