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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

पानी

रामदयाल रोहज

प्रवाहिनी का प्यार है पानी पर्वत का सितार है पानी चमकीले मोती की बुनी हुई कंठी झरना का झरना सिंगार है पानी शबनम बाला की जान है पानी हर सागर की शान है पानी गर्मी की लपटों में ओष्ठ उसके सूखे मौन बैठी झील का अरमान है पानी वर्षा-पाजेबों की छनकार है पानी नाचे नभ में नीरद फनकार है पानी मरुथल में अग्नि के गोले बरसाते दुर्भिक्ष के तन पर तलवार है पानी प्यासे को अमृत का पान है पानी कर देता प्राणों का दान है पानी सृष्टि में पल पल करता है नव सृजन सद्गुण से पूरित रस खान है पानी फूलों का खिलना आधार है पानी माली की मेहनत का सार है पानी आती है बागों में सतरंगी तितली फूलों से मिलना आहार है पानी

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