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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

माता सरस्वती कृपा करो

राज शर्मा

सृष्टि में था जब अभाव वाणी का तब धरे अवतार माता सरस्वती।। युग-युग जीवों के गूंगे भाव को वाक शक्ति का सुसृजन किया।। नमन माँ शारदे ! वीणापाणी माँ तिमिर से तुमने उजयारा किया।। अंकनी को दिव्यता प्रदान कर करूं मैं नित काव्य रस सृजन।। जिव्हा कंठ में वास हो तेरा माता निज रचना को श्रृंगार से निखारु।। अंकिनी में सुप्राण भर दे माँ शारदे भक्ति,वीर श्रृंगार रस में सृजन करूं।।

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