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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

रहें सभी हम एक

नवीन कुमार भट्ट नीर

तू तू मैं मैं छोड़िए,रहें सभी हम एक। कर संकट का सामना,सबसे बड़ा विवेक।। राजनीति का है नहीं,ये मायावी जंग। आपस में सुलझाइए,सब रह जाये दंग।। भारत मां के लाडलो,पत्र करो स्वीकार। संकट में हो एकता,मत देना दुत्कार। कोरोना का संक्रमण,गली चाक चौबंद। कुछ दिन घर में बैठ के,खूब करें आनंद।। समय नहीं है साथियो,मत कसिएगा तंज‌। कोरोना का डर यहां,बन बैठा है रंज।।

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