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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

कोरोना को हमने भगाना है

डॉ० अनिल चड्डा

बहुत रहे नजदीक-नज़दीक हम दूरी को अब तो निभाना है दूरी से अब एक हो कर कोरोना को हमने भगाना है कलयुग का राक्षस है कोरोना जाने बलि कितनी लेगा इसको पास न आने देना दूरी से ही हराना है अस्त्र-शस्त्र कोई काम न आयें दवा से नहीं ये मरता है साफ-सफाई को प्यार करो सब हाथ धोएं और धुलाना हैं ज्ञान सभी के धरे रह गये डरें सभी, छुप कर हैं रहते चढ़ न जाएं हाथों पर मेरे हाथों को नहीं मिलाना है

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