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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

आज फिर से

अमित डोगरा

चलो आज फिर से, एक बार अजनबी होकर मिलते हैं। चलो आज फिर से , एक दूसरे का नाम पूछते हैं। चलो आज फिर से बैठकर एक दूसरे से बातें करते हैं । चलो आज फिर से , कहीं टहलने चलते हैं। चलो आज फिर से, आसमान तले तारों की रात में गुनगुनाते हैं। चलो आज फिर से, एक बार फिर ख्वाबों की दुनिया में खो जाते हैं। चलो आज फिर से, एक बार फिर एक दूसरे को मनाते हैं । चलो आज फिर से, एक दूसरे के हो जाते हैं


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