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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

हाइकु

अशोक बाबू माहौर

1. पतला दूध मिला दिया है पानी स्वादिष्ट नहीं 2. आँखें दिखाती शहर की सडकें रुठीं पगली 3. फटा कम्बल धो रही क्यों औरत मन सुभाय 4. तपी जमीन अंगीठी सी चुभती दुखता मन

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