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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

डर क्या होता है

डॉ० डी एम मिश्र

छूट गया घर तब जाना घर क्या होता है कोरोना ने दिखलाया डर क्या होता है सारे सपने मेरे भी हो जाते पूरे चूक गया तब जाना अवसर क्या होता है बचपन में मैंने भी मूरत पूजा की है ठोकर खाकर जाना पत्थर क्या होता है ठेकेदारों और कहीं जाओ तो अच्छा मुझको है मालूम कि ईश्वर क्या होता है भटक गया मंज़िल से तब एहसास हुआ राह दिखाने वाला रहबर क्या होता है आप नहीं समझेंगे भीतर की ज्वाला को आग न बुझ पाये तो रोकर क्या होता है साथ रहा वो जब तक उसकी कर्द नहीं की बिछड़ गया तो समझा दिलबर क्या होता है जिनके खेतों में उगती है सिर्फ़ निराशा उनसे जाकर पूछो बंजर क्या होता है

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