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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

कठिन डगर
(ताटंक छंद)

महेन्द्र देवांगन माटी

कठिन डगर है ये जीवन का, कभी नहीं घबराना जी । संकट में है देश हमारा, सबको जोश दिलाना जी ।। कोरोना बीमारी देखो, कैसे चलकर आया है । दिखे नहीं यह सूक्ष्म जीव पर, पूरी दुनिया छाया है।। साफ सफाई रखना सीखो, भीड़ भाड़ मत जाना जी। कठिन डगर है ये जीवन का, कभी नहीं घबराना जी ।। बंद हुए सब घर के अंदर, ये कैसा दिन आया है। काम धाम सब बंद पड़े हैं, कितने संकट लाया है।। आयेगा अब नया सवेरा, हिम्मत सभी दिलाना जी । कठिन डगर है ये जीवन का, कभी नहीं घबराना जी ।।

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