Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 13, मई(द्वितीय), 2017



कई और बंगलादेश बना देंगे

राजेश श्रीवास्तव

तुम बार-बार-
हमारी सहनशीलता की -
परीक्षा लेते हो /
जीत जाने पर बुजदिल, और-
हारने पर असहिष्णु /
नाम देते हो /
तुम पत्थर चलाते रहो, और -
हम फूल बरसाते रहें /
ये कैसा तुमने -
शौक पाल रखा है /
सहनशीलता का ठेका
क्या अकेले हमने ही -
सम्भाल रखा है /
एक गाल में थप्पड़ -
जड़ दो तुम तो /
दूसरा हम बढ़ा देंगे /
दोनों गालो को छुआ अगर तो -
जन्नत की राह दिखा देंगे /
फेंक के पत्थर ,
उठा लो तिरंगा /
अपने – अपने हाथ में /
तुम सुरक्षित रह पाओगे /
केवल भारत के साथ में /
तुम्हे आज़ादी पसंद है तो /
हमें भी गुलामी पसंद नहीं /
सिंधियों , बलूचों और ,
गुलाम कश्मीरियों का -
तड़पना अब बर्दास्त नहीं /
सुधर जाओ अब भी -
वरना हम अपना /
एक और रूप दिखा देंगे /
उठा लिए गांडीव हाथों में तो -
कई और बंगलादेश बना देंगे /

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें