Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 13, मई(द्वितीय), 2017



खालीपन

गुलाब चंद पटेल

खालीपन हे मेरे ह्रदय में, 
कुश भी स्पष्ट नहीं है मनमें, 
दुविधा है इस चित मे! 
कुष कहने के लिए जब भी खुलते हैं होंठ, 
शब्द फरियाद लेकर आते हैं मेरे मनमे! 
पीछे मुड़ न सकूँ सोच के उपवन में! 
कुछ भी बदलाव नहीं आया, गर्मी, सर्दी, बरसात  में! 
है कोई जिसने मधुर अमृत देखा हो, 
ये आग उगलती दुनिया में? 
ढाई शब्‍द प्रेम की आड़ में जाने क्यों 
 लोग भर लेते हैं सारी वेदना अपने दिल में? 
दोस्तो कड़वी बात लगे तो माफ़ करना मुझे, 
			ये तो बस यूही खयाल आया मेरे दिल में! 			 

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें