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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

अरमान ......

सुशील यादव दुर्ग

जमीन और आसमान हसीन चाहता हूं मै तेरे वादों का बस यकीन चाहता हूं जुगाड़ की हैं हमारे पास कुछ बोतलें है बन्दोबस्त बता नमकीन चाहता हूं चाँद- तारे तोड़ने में मत गंवा जवानी शौक से ला दे पाक -चीन चाहता हूं मेरे पास है वोटो का जखीरा मगर रखना अपनी जात कुलीन चाहता हूं शहंशाहों के ताज हमने उतरते देखे तेरा अहँकार ताजातरीन चाहता हूँ बेतरतीब जीने के हैं नुकसान बहुत अब जिंदगी बाकी बेहतरीन चाहत हूँ


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