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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

एहसान चुकता कर दिया

डा. अनिल चड्डा

शुक्रिया जता कर एहसान चुकता कर दिया, दो ही लफ्जों में था हिसाब पूरा कर दिया ! शोर करते थे बहुत, कर देंगें ये, कर देंगें वो, वक्त पड़ने पर तो मुश्किलों को दूना कर दिया ! साजिशों से भर चुकी राहों पे चलना था मुहाल, तूने भी कर अलविदा, राहों को सूना कर दिया ! गौर फ़रमायेंगें क्या जो अपने में मशगूल हों, आंसूओं ने गम को अपने थोड़ा हल्का कर दिया ! है ‘अनिल’ बर्बाद, अब आबाद क्या होना सनम, अपनों ने बर्बादी में ख़ासा इजाफा कर दिया !


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