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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

केवल खुशियां कब आती हैं

आलोक कौशिक

तक़दीर में केवल खुशियां कब आती हैं सच्चे प्यार में परेशानियां सब आती हैं छुपा ना रहे जब राज़ कोई दरमियां मोहब्बत में गहराइयां तब आती हैं सोचा भूल गया तुझसे बिछड़के लेकिन तेरे संग गुजारी शामें याद अब आती हैं फैल जाती है खुशबू सारी फ़िज़ाओं में तेरे तन को छूकर हवायें जब आती हैं


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