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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

सलाह

डा नन्द लाल भारती

सुभौता अब तो आंसू बहाना बंद करो, तीन साल से भैय्या और तुम आंसू बहा रहे हो क्या मिल रहा है।बड़े अरमान से बिना दहेज शादी कर बहू लायी,इतनी इज्ज़त दिए,बहुरूपिये,बदमाश मां बाप की बेटी ने घर परिवार की इज्ज़त का जनाजा निकाल दिया । बहन हम तो सब कुछ भूलकर बेटे की खुशी के लिए अपनाने की कोशिश कर रही हूँ पर परजीवियों को बेटे से बात करना खलने लगता है शालिनी बहन ।

परजीवी से क्या मतलब ?

अंधी बहू के मां-बाप और उसके चार बहनों का परिवार जो बेटे के टुकड़े पर पल रहे है।

हे भगवान ऐसे भी भीखारी हैं क्या दुनिया मे ?

ना जाने बहुरूपिओं ने कैसे मति मार दिया कि हम जादूगर, बदमाश भीखारी बाप की बेटी को बहू बना लाये,जब से अंधी आयी है सकून और शान्ति छिन गई है।

बहू तो घर परिवार की सुख शांति के लिए जीती-मरती हैं । ये तो लूटेरे मां बाप की बेटी अपना लूटा रही है, घर परिवार के दुःख पर जश्न मना रही है, कह दो बेटे से दे दे तलाक । नही बहन नही तलाक नहीं। परिवार विरोधी जितनी साजिशें रची है वह सब हम भूलाकर बहू को बहू का दर्जा देना चाहते हैं पर उसकी मां ही अपने हाथों बेटी की दुनिया उजाड रही है, इस चाल को ना मेरा बेटा समझ रहा है ना बहू ।

बेटा की कमाई अंधी बहू के मां बाप लूट रहे हैं, भीखारी बाप की औलाद बहू ब्राण्डेड चीजों की शौकीन हो गई है ।लाखों कमाने वाला बेटा फटे पुराने कपड़ें पहन रहा है । बेटा सास ससुर के लिए श्रवणकुमार हो गया है ।हमे सौतेला मां बनवा दिया है, जादूगर सास - ससूर ने ऐसा क्या कर दिया है कि इंजीनियर बेटा गुलाम हो गया है ।

सुभौता बहन आंसू पोछो और बेटा बहू को कर दो बेदखल ताकि बची हुई जिन्दगी सकूं से जी सको बूढे -बूढी ।परमात्मा पर विश्वास रखो जो बहरूपिये तुम्हारी दुनिया लूट रहे हैं उनकी दुनिया ऐसी लूटेगी कि खुद के आंसू मे डूब मरेंगे ।

कैसे अपने खून को अपने से अलग कर दूं मन नहीं मानता फिर भी तुम्हारी सलाह पर विचार करुंगी शालिनी बहन ।


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