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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

हारना मत यार

डॉ० सुनील कुमार परीट

तू आत्मबल मत खो यार दुनिया करती मरने को मजबूर। चलते चलना है फूल काँटो पे पर दुनिया का यही है दस्तूर॥ तू निराश मत हो यार दुनिया में पैसेवालों का है गुरुर। रिश्ते नातों का नहीं कोई मोल दुनिया में छाया पैसे का सुरुर॥ तू डरपोक मत बन यार दुनिया तेरे आगे झुकती है। धीरज बँधकर आगे चलना सदा आई रात भी ढलती है॥ तू ऐसे चुप बैठ मत यार दुनिया से आगे निकलना है। कर भरोसा ऊपरवाले पर आज भवसागर पार करना है॥ तू कभी हारना मत यार अब मन में विश्वास बँध ले। जीत न मिली कसौटी बाकी है उठ, अभी आत्मविश्वास भर ले॥


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