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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

भारत माता की जय

डॉ० सुनील कुमार परीट

जिनको बोलना है बोलो मेरे संग हट जाओ बाजू में ना बोलना हो। तुम्हारा मकसद हम सब जानते है जाओ गर अमृत में विष घोलना हो॥ इंसानियत की जरा सी फिक्र हो समझो वतन की महकती चमन को। खून खराबा मत होने दो भाई बरकरार रहने दो हसीन अमन को॥ क्या बिगाडा किसी ने तुम्हारा कभी नफरत भूलकर हमसफर बन जाओ। भाईचारे का फतवा फहराओ जहाँ में तो अभी जन्नत सा मधुवन पाओ॥ हमने साथ निभाना सीख लिया है प्यार मुहब्बत तो नस नस में भरा है। दिमाग से नहीं जरा दिल से काम लो घृणा से जीता नहीं अक्सर हारा है॥ दिल में प्यार भर लो यारों अब आखिरी मौका हाथ से न खोना है। वतन का प्यार पाकर जीना है भारत माता की जय बोलना है॥


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